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दिल्ली मार्च में जा रहे उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी अध्यक्ष को रोकने पर हाईकोर्ट की पुलिस को फटकार

देहरादून। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने दिल्ली में आयोजित सीजेपी के संसद मार्च में शामिल होने जा रहे उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के अध्यक्ष प्रभात ध्यानी को राज्य पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है।
मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने पुलिस से पूछा कि यदि धारा 144 का उल्लंघन होना था तो वह दिल्ली में होता, ऐसे में उत्तराखंड पुलिस को कार्रवाई करने का अधिकार किस आधार पर मिला। अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि यह कार्रवाई “गुंडागर्दी” जैसी प्रतीत होती है।


अदालत ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा, “आप इस देश में क्या कर रहे हैं? क्या सरकार की छवि बचाने के लिए हैं या लोगों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए? पुलिस का यह आचरण पूरी तरह हास्यास्पद है।”
यह टिप्पणी उस याचिका की सुनवाई के दौरान की गई जिसमें आरोप लगाया गया कि 20 जुलाई को प्रभात ध्यानी को नई दिल्ली में आयोजित संसद मार्च में शामिल होने के लिए जाते समय उत्तराखंड पुलिस ने हिरासत में ले लिया था।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी और एक अन्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने की। सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस की कार्रवाई की वैधानिकता और अधिकार क्षेत्र को लेकर कई तीखे सवाल उठाए।

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दिगंबर उपाध्याय
दिगंबर उपाध्याय
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