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टिहरी बांध झील के 42 किमी जल क्षेत्र में पर्यटन विकास की उम्मीद, पुनर्वासित परिवारों के हाथ खाली

चिन्यालीसौड़। टिहरी बांध की विशाल झील में पर्यटन की अपार संभावनाएं होने के बावजूद चिन्यालीसौड़ क्षेत्र आज भी पर्यटन विकास की ठोस योजना का इंतजार कर रहा है। टिहरी से चिन्यालीसौड़ तक करीब 42 किलोमीटर के दायरे में फैली झील, जिसका जलस्तर आरएल 830 मीटर तक रहता है, पर्यटकों के लिए आकर्षण का बड़ा केंद्र बन सकती है। बावजूद इसके झील आधारित पर्यटन, वाटर स्पोर्ट्स और स्थानीय स्वरोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए हैं।

सबसे बड़ी विडंबना यह है कि बांध निर्माण के लिए जिन ग्रामीणों और परिवारों ने अपनी पुश्तैनी जमीनें प्रशासन को दीं, उनके परिवारों के सामने आज भी रोजगार का संकट बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि झील बनने के बाद उनकी जमीनें तो चली गईं, लेकिन पर्यटन और झील से जुड़े रोजगार के अवसर उन्हें नहीं मिल सके। इसे लेकर ग्रामीणों में शासन-प्रशासन के प्रति नाराजगी भी देखी जा रही है।

वाटर स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट और नौकायन की संभावनाएं

जानकारों के अनुसार चिन्यालीसौड़ झील में नौकायन, वाटर स्पोर्ट्स, प्रशिक्षण केंद्र तथा पर्यटन गतिविधियों के लिए अनुकूल परिस्थितियां विकसित की जा सकती हैं। यदि योजनाबद्ध तरीके से झील को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाए तो स्थानीय युवाओं को नौकायन, होटल, होम-स्टे, परिवहन, गाइड, साहसिक पर्यटन सहित विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार मिल सकता है।

लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि झील की पर्यटन क्षमता के बावजूद शासन-प्रशासन की ओर से इस दिशा में प्रभावी पहल नहीं हुई। जनप्रतिनिधियों द्वारा भी इस मुद्दे को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं दिए जाने से क्षेत्रवासियों में निराशा है।

डूब गया जीएमवीएन का बंगला, पर्यटकों के ठहरने की सुविधा भी नहीं

चिन्यालीसौड़ में कभी गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) का बंगला हुआ करता था, जहां तीर्थयात्री और पर्यटक ठहरते थे। टिहरी बांध झील के जलभराव में यह भवन डूब गया। इसके बाद जीएमवीएन की ओर से यहां पर्यटकों के लिए ठहरने की वैकल्पिक व्यवस्था विकसित नहीं की गई।

आज भी टिहरी बांध की विशाल झील को देखने के लिए पर्यटक चिन्यालीसौड़ पहुंचते हैं, लेकिन उचित आवासीय एवं पर्यटन सुविधाओं के अभाव में उन्हें अन्य स्थानों की ओर रुख करना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यहां अच्छे होटल, होम-स्टे, जीएमवीएन आवास, रेस्टोरेंट और अन्य पर्यटक सुविधाएं विकसित की जाएं तो चिन्यालीसौड़ एक महत्वपूर्ण पर्यटन पड़ाव बन सकता है।

स्वरोजगार और पर्यटन नीति की जरूरत

स्थानीय लोगों के मुताबिक क्षेत्र में पर्यटन और स्वरोजगार को लेकर स्पष्ट एवं दीर्घकालिक नीति का अभाव है। झील का उपयोग केवल जल संसाधन के रूप में न होकर पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था के विकास के लिए भी किया जाना चाहिए। इससे बांध प्रभावित परिवारों और स्थानीय युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार के अवसर मिल सकते हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता सुमन बड़ोनी, प्रकाशचंद रमोला और धर्मानंद बिजल्वाण का कहना है कि यदि सरकार और शासन-प्रशासन इच्छाशक्ति दिखाएं तो चिन्यालीसौड़ झील को एक बड़े पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है। इसके लिए झील आधारित पर्यटन की ठोस कार्ययोजना, वाटर स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट, नौकायन की सुविधा, पर्यटकों के ठहरने की व्यवस्था और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार एवं प्रशिक्षण की योजनाएं शुरू करनी होंगी।

स्थानीय लोगों की मांग है कि सरकार चिन्यालीसौड़ झील के पर्यटन विकास के लिए स्पष्ट नीति बनाकर समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करे, ताकि बांध प्रभावित परिवारों और स्थानीय युवाओं को झील से रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर मिल सकें।

झील से चिन्यालीसौड़ झील में पर्यटन की अपार संभावनाएं, रोजगार की राह अब भी बंद

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दिगंबर उपाध्याय
दिगंबर उपाध्याय
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