भटवाड़ी /उत्तरकाशी ।
उत्तरकाशी जिले के विश्व प्रसिद्ध दयारा बुग्याल में आयोजित होने वाले पारंपरिक बटर फेस्टिवल को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। आयोजन के प्रचार-प्रसार ने रफ्तार पकड़ ली है, जिससे क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। स्थानीय ग्रामीणों के साथ पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोग भी इस आयोजन को सफल बनाने में जुट गए हैं।
दयारा बुग्याल के आधार शिविर गांव रैथल, क्यार्क, बन्द्राणी, नटीन और भटवाड़ी के ग्रामीण भगवान समेश्वर देवता की अगुवाई में पिछले कई वर्षों से इस लोकपर्व को नए स्वरूप में मना रहे हैं। चारागाहों की संस्कृति और लोक परंपराओं से जुड़ा यह आयोजन अब पर्यटन की दृष्टि से भी नई पहचान बना चुका है।
दयारा पर्यटन समिति के अध्यक्ष मनोज राणा ने बताया कि बटर फेस्टिवल को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का श्रेय स्वर्गीय चन्दन सिंह राणा की दूरदर्शी सोच और प्रयासों को जाता है। उनके प्रयासों से दयारा बुग्याल आज देश-विदेश के पर्यटकों और ट्रैकर्स के लिए प्रमुख आकर्षण बन गया है। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़े हैं।

समिति के अनुसार 16 अगस्त की रात्रि को ग्रामीणों और पर्यटकों का दल दयारा बुग्याल के बेस कैंप के लिए रवाना होगा। 17 अगस्त को भाद्रपद संक्रांति के अवसर पर दयारा बुग्याल की मखमली घास पर दूध, दही, मट्ठा और मक्खन की पारंपरिक होली खेली जाएगी। इस दौरान रासो नृत्य, देव डोली नृत्य तथा देवता पशुवा द्वारा दोहे के डागरों पर पारंपरिक नृत्य सहित अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम आकर्षण का केंद्र रहेंगे।
रात्रि में रैथल स्थित मां भगवती जगदम्बा प्रांगण में भव्य लोकगीत संध्या आयोजित होगी। इसमें प्रसिद्ध लोकगायिका मंजू नौटियाल, लोकगायक धनराज शौर्य तथा स्थानीय लोकगायक अंकित पंवार अपनी प्रस्तुतियों से सांस्कृतिक संध्या को यादगार बनाएंगे।
बॉक्स : पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
दयारा बुग्याल में आयोजित होने वाला बटर फेस्टिवल अब केवल पारंपरिक पर्व नहीं, बल्कि उत्तरकाशी के प्रमुख पर्यटन आयोजनों में शामिल हो चुका है। हर वर्ष बड़ी संख्या में पर्यटक और ट्रैकर्स इसमें शामिल होकर स्थानीय संस्कृति, लोक परंपराओं और हिमालयी जीवनशैली का अनुभव करते हैं।
– दूध, दही, मट्ठा और मक्खन की होगी पारंपरिक होली, लोक संस्कृति के रंगों से सराबोर होगा सीमांत क्षेत्र
रविंद्र सिंह रावत



